मुजाहिर प्रधानमंत्री क्यों !
मुजाहिर प्रधानमंत्री क्यों !
चुनाव की चक चक शुरू हो चुकी है। हर कोई अपना अपना राग अलाप रहा है। सबसे ज्यादा झगडा प्रधानमंत्री पद को लेकर है। आधा दर्जन से ज्यादा माननीय प्रधानमंत्री बनने को उतावले हो रहे है। सब अपने अपने हिसाब से सीटों का बंटवारा करके राजनीति कर रहे है। आम जनता का ख्याल किसी को नहीं, बस सत्ता की कुर्सी पाने की जुगत में हैं सभी। अडवानी जी ख़ुद को सबसे ज्यादा प्रबल दावेदार बता रहे हैं। कांग्रेस पहले कभी प्रधानमंत्री का प्रत्याशी घोषित करके चुनाव नहीं लड़ी लेकिन अबकी मजबूरी में उसने भी मनमोहन सिंह को यूपीए की तरफ़ से पीएम बता दिया हैं। बसपा की चुनावी सभाओं में मायावती को प्रधानमंत्री बताने वाले होर्डिंग दिखाई दे रहे हैं। लालू भी अडवानी की कुंडली में प्रधानमंत्री का योग नहीं होने की बात कहकर ख़ुद के लिए यह कहते नहीं शरमाते कि मैं एक दिन देश का प्रधानमंत्री जरूर बनूँगा। तीसरा और चौथा मोर्चा अभी कोई नाम फाइनल नहीं कर पाया हैं लेकिन दावेदार बहुत हैं। अब आईये बात करते हैं सबसे प्रबल दावेदार अडवानी जी की। इस बार उनकी बातों से ऐसा लगता हैं जैसे उन्हें अटल जी के राजनीतिक सन्यास या चुनाव मैदान से हटने का इंतजार था। यानी वो प्रधानमंत्री की लाइन से हटें और मैं भाजपा की तरफ़ से दावा करूँ। मनमोहन सिंह की प्रोफाइल के आगे अडवानी जी कही नहीं टिकते लेकिन उन्हें नाकाबिल बताने में कोई गुरेज नहीं करते। अभी कुछ दिन पहले सरदार जी ने कह ही डाला कि बाबरी मस्जिद गिराने के अलावा अडवानी जी का देश के लिए कोई योगदान नहीं हैं। होम मिनिस्टर रहते उन्होंने वो आतंकवादी पाकिस्तान के हवाले कर दिए जो आज देश के लिए सबसे ज्यादा खतरा बन गए हैं। यही आतंकवादी सैकडों की तादाद में जेहादी पैदा करके युवको को ट्रेनिंग देकर भारत पर हमला करने के लिए भेज रहे हैं। इस समय जितने भी आतंकवादी संगठन भारत की नाक में दम किए हैं वे सभी उन्ही आतंकवादियों द्वारा chalaye ja रहे हैं जो अडवानी द्वारा रिहा किए गए थे। फिर वे आतंकवाद नहीं रोक पाने का aarop dusro पर कैसे लगा सकते हैं। एक कवि ने अपनी रचना में कह डाला कि अडवानीजी का birth place पाकिस्तान में हैं इसलिए उन्हें अपनी janmbhoomi से lagav hai. इसलिए वे jinna कि majar पर गए और उन्हें sekular भी बता डाला। अगर उनकी यही सोच हैं तोह वे भारत के लिए मुजाहिर हुए। इसलिए भारत के लोग एक मुजाहिर को अपना प्रधानमंत्री कैसे अपना सकते हैं।
चुनाव की चक चक शुरू हो चुकी है। हर कोई अपना अपना राग अलाप रहा है। सबसे ज्यादा झगडा प्रधानमंत्री पद को लेकर है। आधा दर्जन से ज्यादा माननीय प्रधानमंत्री बनने को उतावले हो रहे है। सब अपने अपने हिसाब से सीटों का बंटवारा करके राजनीति कर रहे है। आम जनता का ख्याल किसी को नहीं, बस सत्ता की कुर्सी पाने की जुगत में हैं सभी। अडवानी जी ख़ुद को सबसे ज्यादा प्रबल दावेदार बता रहे हैं। कांग्रेस पहले कभी प्रधानमंत्री का प्रत्याशी घोषित करके चुनाव नहीं लड़ी लेकिन अबकी मजबूरी में उसने भी मनमोहन सिंह को यूपीए की तरफ़ से पीएम बता दिया हैं। बसपा की चुनावी सभाओं में मायावती को प्रधानमंत्री बताने वाले होर्डिंग दिखाई दे रहे हैं। लालू भी अडवानी की कुंडली में प्रधानमंत्री का योग नहीं होने की बात कहकर ख़ुद के लिए यह कहते नहीं शरमाते कि मैं एक दिन देश का प्रधानमंत्री जरूर बनूँगा। तीसरा और चौथा मोर्चा अभी कोई नाम फाइनल नहीं कर पाया हैं लेकिन दावेदार बहुत हैं। अब आईये बात करते हैं सबसे प्रबल दावेदार अडवानी जी की। इस बार उनकी बातों से ऐसा लगता हैं जैसे उन्हें अटल जी के राजनीतिक सन्यास या चुनाव मैदान से हटने का इंतजार था। यानी वो प्रधानमंत्री की लाइन से हटें और मैं भाजपा की तरफ़ से दावा करूँ। मनमोहन सिंह की प्रोफाइल के आगे अडवानी जी कही नहीं टिकते लेकिन उन्हें नाकाबिल बताने में कोई गुरेज नहीं करते। अभी कुछ दिन पहले सरदार जी ने कह ही डाला कि बाबरी मस्जिद गिराने के अलावा अडवानी जी का देश के लिए कोई योगदान नहीं हैं। होम मिनिस्टर रहते उन्होंने वो आतंकवादी पाकिस्तान के हवाले कर दिए जो आज देश के लिए सबसे ज्यादा खतरा बन गए हैं। यही आतंकवादी सैकडों की तादाद में जेहादी पैदा करके युवको को ट्रेनिंग देकर भारत पर हमला करने के लिए भेज रहे हैं। इस समय जितने भी आतंकवादी संगठन भारत की नाक में दम किए हैं वे सभी उन्ही आतंकवादियों द्वारा chalaye ja रहे हैं जो अडवानी द्वारा रिहा किए गए थे। फिर वे आतंकवाद नहीं रोक पाने का aarop dusro पर कैसे लगा सकते हैं। एक कवि ने अपनी रचना में कह डाला कि अडवानीजी का birth place पाकिस्तान में हैं इसलिए उन्हें अपनी janmbhoomi से lagav hai. इसलिए वे jinna कि majar पर गए और उन्हें sekular भी बता डाला। अगर उनकी यही सोच हैं तोह वे भारत के लिए मुजाहिर हुए। इसलिए भारत के लोग एक मुजाहिर को अपना प्रधानमंत्री कैसे अपना सकते हैं।

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